लाल किल्ले से उखाड़कर लाये हुए कपाट!!!!

यही हैं वह चित्तौड़गढ़ के किले के अष्टधातु के कपाट, जिनको अल्लाउद्दीन खिलजी वहाँ से उखाड़ दिल्ली ले आया था:

और सन 1764 में दिल्ली से जाट, अहमदशाह अब्दाली की नाक तले से उखाड़ भरतपुर ले आये थे|

फिर इनको भरतपुर से वापिस पाने हेतु चित्तौड़गढ़ ने आज की कीमत में लगभग नौ करोड़ रूपये की पेशकश की थी| परन्तु सवाई महाराजा भारतेन्दु जवाहरमल ने कहलवाया कि, “स्वाभिमान की कोई कीमत नहीं होती, फिर भी किवाड़ चाहियें तो वैसे ही ले जाएँ, जैसे जाट दिल्ली के लालकिले से उखाड़कर लाये हैं”!

इन कपाटों को लालकिले से उखाड़ने का जुनूनी किस्सा अपने आप में रोंगटे खड़े कर देने वाला है|

इन किवाड़ों के फाटक को तोड़ने के लिए पहले हाथी के माथे पर गुड़ तैयार करने वाले लोहे के बड़े कढाहे बाँध धक्के लगवाए गए| परन्तु जब उनमें से भी किवाड़ों की कीलें पार कर हाथियों को चुभने लगी तो तब महाराजा के मामा बलराम जी ने आदेश दिया कि उनको खुद हाथियों के माथे पे बाँधा जाए| यह था उनका अपने जीजा महाराजाधिराज सूरजमल सुजान के प्रति प्रेम कि उनकी धोखे से की गई हत्या के बदले के जूनून के आगे उनको अपनी मौत भी छोटी लगी| और जब किवाड़ों की यह कीलें उनके सीने में धंस गई तो हाथी पूरा जोर लगा पाए और ऐसे बलराम जी की शहादत के ऐवज में दिल्ली के लालकिले में लगे यह किवाड़ खोले गए, लालकिला लूटा गया, अफ़ग़ान-मुग़ल यह “जाटगर्दी” अवाक खड़े देखते रह गए और इस तरह लालकिले के दीवान-ए-ख़ास में लगे मुग़लों के सिंहासन समेत जाट यह चित्तोड़गढ़ी किवाड़ भी उखाड़ भरतपुर ले आये| इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि महाराजा सूरजमल सुजान की धोखे से की गई हत्या से जाट इतने रूष्ट हुए थे कि पूरी दिल्ली में यूँ तांडव मचा था जैसे साक्षात् शिवजी भोला उर्फ़ दादा ओडिन दी वांडरर जी महाराज तीसरी आँख खोल नाच रहा हो|

आज भी यह कपाट भरतपुर शहर के दिल्ली-गेट की शोभा बढ़ा रहे हैं| कभी उधर जाना हो तो इनको जरूर देखकर आएं, अपने गौरवशाली इतिहास और पुरखों पर अभिमान महसूस होगा|

दिल्ली की इस जीत पर कवि जयप्रकाश घुसकानी लिखते हैं:

कौन कहँ थे जाट लुटेरे, तारीख के पाठों में,
लूटने के लिए ताकत चाहिए, जो थी बस जाटों में!
मुग़लों का सिंहासन जाट, दिल्ली से उखाड़ लाये,
साथ में नजराना और चित्तौड़गढ़ के किवाड़ लाये!!
धोखा पट्टी सीखी नहीं, जंग में पछाड़ लाये,

जय यौद्धेय

जय #आर्यवर्त

Author: Gautam Kothari (Aaryvrt)

राष्ट्रहित सर्वोपरी जयतु हिन्दुराष्ट्रम वंदे मातरम

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s