अखण्ड,प्रचण्ड और खण्ड-खण्ड ।।

अखण्ड,प्रचण्ड और खण्ड-खण्ड :-

खण्ड-खण्ड प्रचण्ड था जिसका, वो मेरा भारत था अखण्ड !
खण्ड-खण्ड हुवा भारत मेरा, ना दिखता अब कुछ प्रचण्ड !!

भीष्म से भयंकर वीर से अर्जुन के अँधा-धुन्द तीर से, भारत दिखता था प्रचण्ड !
शकुनी से अपने मामा ने देखो, भारत को किया खण्ड-खण्ड !!

बप्पा रावल का राज्य ईरान तक, भारत दिखता था प्रचण्ड !
कुम्भा के कर-कमलो में, भारत दिखता था अखण्ड !

जयचंद कि जयकर गूँजती, भारत दिखता था प्रचण्ड !
आल्हा-उदल से उदार झुन्झते, भारत दिखता था अखण्ड !!

पदमनी कि पुकार सुनकर, भारत हुवा था प्रचण्ड !
गोरा-बादल का घमासान देखकर, भारत दिखा था अखण्ड !!

केशरिया निशानी अखण्ड कि, जौहर ज्वाला थी प्रचण्ड !
खण्ड-खण्ड हुवा भारत मेरा, कुछ ना दिखता अब प्रचण्ड !!

बाबर बोला हम हुवे प्रचण्ड, सांगा शरीर हुवा खण्ड-खण्ड !
रजपूती शौर्ये को देखकर, भारत दिखता था प्रचण्ड !!

रजपूती शौर्ये था प्रचण्ड, अब रजपूती भी हुयी खण्ड-खण्ड !
बिन रजपूती के मेरा भारत, कैसे रह पाता अखण्ड !!

सिंहा से सरताज देखकर, भारत लगता था प्रचण्ड !
पाबू के परोपकार देखकर, भारत दिखता था अखण्ड !!

खण्ड-खण्ड में राणा-शिवा थे, भारत दिखता था प्रचण्ड !
बिन राणा और शिवा के, भारत दिखता अब खण्ड-खण्ड !

मान सिंह कि काबुल फतेह से, भारत दिखता था प्रचण्ड !
मान सिंह के बिना मान के, भारत हुवा था खण्ड-खण्ड !!

दुर्गादास का साहस अखण्ड था, भारत दिखता था प्रचण्ड !
दुर्गादास बिना ना कोई आश, भारत दिखता अब खण्ड-खण्ड !!

अमर सिंह तो अमर हुवे पर, भारत दिखता था प्रचण्ड !
खण्ड-खण्ड अब भारत मेरा, कुछ न दिखता अब प्रचण्ड !!

जयमल की जयकार गूँजती, भारत दिखता था प्रचण्ड !
फत्ता सा फौलादी झुन्झता, भारत दिखता था अखण्ड !!

सुरों से इन वीरो से, भारत दिखता था प्रचण्ड !
पण्डो से पाखण्डो से, भारत हुवा खण्ड-खण्ड !!

बल-बुद्धि थी प्रचण्ड और मेरा भारत था अखण्ड !
बिन बल-बुद्धि के कैसे, भारत रहे अब प्रचण्ड !!

खण्ड-खण्ड पर खाण्डा खड़का, तलवारे भी थी प्रचण्ड !
खण्ड-खण्ड हुवा खाण्डा अब तो, तलवारे कैसे रहे प्रचण्ड !!

नर-मुण्डो की माला पहने, भारत दीखता था प्रचण्ड !
नर-मुण्डो की माला बिन, भारत दिखता अब खण्ड-खण्ड !!

पीढ़ी-पीढ़ी खण्ड-खण्ड हुवा और शांत हुवा भारत अखण्ड !
पीढ़ी-पीढ़ी प्रचंडता सिमटी, भारत दिखता है अब खण्ड -खण्ड !!

खण्ड-खण्ड प्रचण्ड था जिसका, वो मेरा भारत था अखण्ड !
खण्ड-खण्ड हुवा भारत मेरा, ना दिखता अब कुछ प्रचण्ड !!

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#रणबंका🗡 #सनातनी🗡

Author: Gautam Kothari (Aaryvrt)

राष्ट्रहित सर्वोपरी जयतु हिन्दुराष्ट्रम वंदे मातरम

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