चार बांस चौबीस गज!!

चार बांस चौबीस गज

चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण !
ता ऊपर सुल्तान है मत चूके चौहान !!
चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण !
ता ऊपर सुल्तान है, मार मार मोटे तवे मत चूके चौहान !!
अबकी चढ़ी कमान ,को जानै फिर कब चढे ।
जिनि चुक्केचौहान, इक्के मारे इक्क सर।।

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#रणबंका🗡 #सनातनी🗡

क्षत्रिय

क्षत्रिय

इस भ्रम से हमको उबरना होगा कि जिसके पास ज्ञान है वह ब्राह्मण है,
क्योंकि ज्ञान यानि ब्रह्म ज्ञान का बोध सर्व प्रथम क्षत्रियों को ही हुआ था,,,,,,
उदहारण के रूप में वासुदेव श्री कृष्णा ने गीता के अध्याय ४ में साफ कहा है कि सृष्टि के आरंभ में यह ज्ञान मैंने सूर्य को दिया ,सूर्य ने मनु को और मनु ने इस्क्षकू को तथा इस प्रकार परंपरा से यह ज्ञान क्षत्रिय ऋषियों के पास था जो बहुत काल पहले नष्ट होगया था उसे मै आज फिर तुम्हे बता देता हूँ ,इसलिए इस भ्रान्ति से उबरिये कि ज्ञान खास कर ब्रह्म ज्ञान कभी किसी ब्राह्मण के पास रहा हो,,,,,

ब्राह्मण प्रकृति के ज्ञाता थे और कर्म कांड के द्वारा प्रक्रितक शोध किया करते थे तथा नयी नयी खोज करना उनका मुख्य कार्य था ,,लेकिन “आत्म ज्ञान ” यानि ब्रह्म ज्ञान कभी भी ब्राह्मणों का विषय और लक्ष्य नहीं रहा ,,,,यह ज्ञान सदेव से ही क्षत्रियो का क्षेत्र रहा है ,,,,

इसीलिए ज्ञात इतिहास में किसी ब्राह्मण को आजतक मोक्ष नहीं मिली जबकि ब्रह्मर्षि विश्वामित्र क्षत्रिय ,महाराज दशरथ ,पितामह भीष्म महाराज रंतिदेव,युधिष्ठर,महाराज हरिचन्द्र और मीराबाई ने जीते जी मोक्ष प्राप्त की है ,,,,,,,

युद्ध लड़ने या सेना में कार्य करने से यदि क्षत्रिय होजाते है तो फिर कृपया बताये कि राजा बलि ,सभी दैत्य कुलीन ब्राह्मण (कश्यप और दिति के वंशज) ,पुलस्त्य ऋषि के वंशज रावण ,कुम्भकरण ,विभीषण आदि,,,
वानर आदिवासी जाति के ,महाराज बाली ,सुग्रीव,अंगद और महावीर हनुमान जी आदि ,,,,,
शूद्र नन्द वंशी सम्राट ,,,ब्राहमण रावहेमू ,,महाराणा के सेना नायको में वैश्य भामाशाह ,,,
यह सभी क्या क्षत्रिय कहलाते है या कहे जाने चाहिए,,,,,,,,,
लडाई लड़ने की आवश्यकता या प्रमुखता क्षत्रिय के ७ गुणों में कहीं पर भी नहीं है,, हां संघर्ष यदि आपदे तो उससे पीछे नहीं हटाना चाहिए यह क्षत्रिय का ५ वां गुण है ,,,,,,,
यदि राज्य करने और लडाई लड़ने वालो को क्षत्रिय मान लिया जाये तब तो सरे मुसलमानों को क्षत्रिय का दर्जा मिल गया होता इसलिए भ्रम पैदा मत कीजिये,,,,,,

अर्जुन का वाक्य सुनिए ” राज्य मिलजाने और युद्ध लड़ने से कोई क्षत्रिय नहीं होजाता क्षत्रिय बनने के लिए क्षत्राणी की कोख से जन्म लेने के साथ ही जीवन भर क्षात्र-धर्म की तपस्या पर तपना पड़ता है” ,,,,,

“जय क्षात्र-धर्म”
#रणबंका🗡 #सनातनी🗡

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मरुधर देश्!!

मरुधर देश…
जल उंडा, थल उजला, नारी नवले वेश,
पुरुष पटघर निपजे, म्हारो मरुधर देश…

जहा पानी गहरा हो, जमीं सोने की तरह चमकदार हो,
जहा नारी का वेश सतरंगी हो और वहा का पुरुष बलवान और वीर हो ऐसा हमारा मरुधर देश हैं…
थाल बजता है सखी,दीठो नैण फुलाय !!
बाजा रे सिर चेतणो ,भूणां कणव सिखाय !!!

वीर धीर जठ जोगि निसरैं, निसरे काकङ बैरँ…….
सतियाँ रि साख भरे,म्हारो मरूधर सैरँ…

सोने री धरती जठै,चाँदी रो आसमान,
रंग रंगीलो रसभर्यो, म्हारो राजस्थान…

#रणबंका🗡 #सनातनी🗡

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भारत का मान बिंदु !!

भारत का मान बिन्दु :-

भारत का मान बिन्दु, केशरिया यह झण्डा हमारा !
मर के अमर हो जाना, पर यह झण्डा न निचे झुकाना !!

लाखो चढ़े थे शमा पर किन्तु बुझने न दी यह ज्योति !
बलिदानों की ये कथाएँ बातों में ना तूम भुलाना !!

बूंदी की शान कुम्भा ने, मेवाड़ में लड़कर बचाई !
उसने नकली किला बचाया, तुम असली निशां ना झुकाना !!

हाथी से टक्कर दिलाकर, छाती से किला तुड़ाया !
वीरों की अमर कहानी, चुल्लू पानी में ना तुम डुबाना !!

पच्चीस वर्ष कष्टों के, प्रताप ने वन में सहे थे !
स्वतंत्रता के दीवानों, का भी यही तराना !!

ओ भारत के वीर सपूतो, ओ राष्ट्र के तुम सितारों !
जननी की लाज कभी तुम, अपने न हाथो लुटाना !!

अपमान औ’ ठोकर की अग्नि अश्रु बूंदों से ना तुम बुझाना !
बुझाना तुम्हे हो कभी तो, खूं की नदी से बुझाना !!

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अखण्ड,प्रचण्ड और खण्ड-खण्ड ।।

अखण्ड,प्रचण्ड और खण्ड-खण्ड :-

खण्ड-खण्ड प्रचण्ड था जिसका, वो मेरा भारत था अखण्ड !
खण्ड-खण्ड हुवा भारत मेरा, ना दिखता अब कुछ प्रचण्ड !!

भीष्म से भयंकर वीर से अर्जुन के अँधा-धुन्द तीर से, भारत दिखता था प्रचण्ड !
शकुनी से अपने मामा ने देखो, भारत को किया खण्ड-खण्ड !!

बप्पा रावल का राज्य ईरान तक, भारत दिखता था प्रचण्ड !
कुम्भा के कर-कमलो में, भारत दिखता था अखण्ड !

जयचंद कि जयकर गूँजती, भारत दिखता था प्रचण्ड !
आल्हा-उदल से उदार झुन्झते, भारत दिखता था अखण्ड !!

पदमनी कि पुकार सुनकर, भारत हुवा था प्रचण्ड !
गोरा-बादल का घमासान देखकर, भारत दिखा था अखण्ड !!

केशरिया निशानी अखण्ड कि, जौहर ज्वाला थी प्रचण्ड !
खण्ड-खण्ड हुवा भारत मेरा, कुछ ना दिखता अब प्रचण्ड !!

बाबर बोला हम हुवे प्रचण्ड, सांगा शरीर हुवा खण्ड-खण्ड !
रजपूती शौर्ये को देखकर, भारत दिखता था प्रचण्ड !!

रजपूती शौर्ये था प्रचण्ड, अब रजपूती भी हुयी खण्ड-खण्ड !
बिन रजपूती के मेरा भारत, कैसे रह पाता अखण्ड !!

सिंहा से सरताज देखकर, भारत लगता था प्रचण्ड !
पाबू के परोपकार देखकर, भारत दिखता था अखण्ड !!

खण्ड-खण्ड में राणा-शिवा थे, भारत दिखता था प्रचण्ड !
बिन राणा और शिवा के, भारत दिखता अब खण्ड-खण्ड !

मान सिंह कि काबुल फतेह से, भारत दिखता था प्रचण्ड !
मान सिंह के बिना मान के, भारत हुवा था खण्ड-खण्ड !!

दुर्गादास का साहस अखण्ड था, भारत दिखता था प्रचण्ड !
दुर्गादास बिना ना कोई आश, भारत दिखता अब खण्ड-खण्ड !!

अमर सिंह तो अमर हुवे पर, भारत दिखता था प्रचण्ड !
खण्ड-खण्ड अब भारत मेरा, कुछ न दिखता अब प्रचण्ड !!

जयमल की जयकार गूँजती, भारत दिखता था प्रचण्ड !
फत्ता सा फौलादी झुन्झता, भारत दिखता था अखण्ड !!

सुरों से इन वीरो से, भारत दिखता था प्रचण्ड !
पण्डो से पाखण्डो से, भारत हुवा खण्ड-खण्ड !!

बल-बुद्धि थी प्रचण्ड और मेरा भारत था अखण्ड !
बिन बल-बुद्धि के कैसे, भारत रहे अब प्रचण्ड !!

खण्ड-खण्ड पर खाण्डा खड़का, तलवारे भी थी प्रचण्ड !
खण्ड-खण्ड हुवा खाण्डा अब तो, तलवारे कैसे रहे प्रचण्ड !!

नर-मुण्डो की माला पहने, भारत दीखता था प्रचण्ड !
नर-मुण्डो की माला बिन, भारत दिखता अब खण्ड-खण्ड !!

पीढ़ी-पीढ़ी खण्ड-खण्ड हुवा और शांत हुवा भारत अखण्ड !
पीढ़ी-पीढ़ी प्रचंडता सिमटी, भारत दिखता है अब खण्ड -खण्ड !!

खण्ड-खण्ड प्रचण्ड था जिसका, वो मेरा भारत था अखण्ड !
खण्ड-खण्ड हुवा भारत मेरा, ना दिखता अब कुछ प्रचण्ड !!

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रियासत- ए – मारवाड़।

रियासत- ए – मारवाड़।
रियासत- ए – मारवाड़ :-

मारवाड़ रियासत हो, राठौड़ो का राज हो !
रणवीरो में रोश हो, जौधा जैसा जोश हो !!

पिथल सा पानी हो, कुम्पा कि कहानी हो !
मीरा सि मेड़तानी हो, साथ माँ भटयाणि हो !!

रक्त में रवानी हो, रण-भूमि इसकी निशानी हो !
शेखा इसके शानी हो, सच्ची ये कहानी हो !!

जौहर की ज्वाला हो, जैता सा जूनून हो !
सिंहाजी सि समझ हो, चुंडाजी जी रि छतर हो !!

चन्द्र सेन चौतरफा हो, माँ नाग्नेच्या रि कृपा !!
जसवंत सिंह सि झुंझलाहट, राठौड़ो कि हर तरफ आहट हो !

गज सिंह कि गर्जना हो, हणुवन्त सिंह कि हुँकार हो !
मारवाड़ का गुणगान हो, हाथा में तलवार हो !!

रण-बंको को रहम हो, पर रण -भूमि सबसे अहम हो !
रिडमल सि राजनीती हो, आ बात अठे बीती हो !!

चांदा रि चतुराई हो, मेडतिया रि बडाई हो !
बिका सि बहादुरी हो, चाहे सामने शेरशाह सुरी हो !!

चाम्पा सा चरित्र हो, मुकन्दास सा मित्र हो !
मेडतिया रि वो मार हो, अमर सिंह सि कटार हो !!

कांधल रि किर्ति हो, माँ करणी रि कृपा हो !
मालदेव सि मात हो, राठौड़ जग – विख्यात हो !!

जैमल रि जयकार हो, राजपुताना रि पुकार हो ,
फत्ता सा फौलाद हो, शेखा सी औलाद हो !!

जौधा जैसा जंगी हो, तो भाग ज्यावे फिरंगी हो !
पाबु रा प्रवाडा जो याद करया आवे आडा !!

दारू हो दाखिरा रि, धरती हो आ वीरा रि !
शूरा हो शिकार हो, हाथा में तलवार हो !!

रघुकुल रा वटकाला हो, जौहर रि ज्वाला हो !
गौरबन्द रा गीत हो, राठौड़ा रि जीत हो !!

दुदाजी रा दिदार हो, हाथा में तलवार हो !
आसोप से आश हो, उदा से उम्मीद हो !!

दुर्गा जैसा दम हो, साथ आप और हम हो
मारवाड़ लुन्ठो होवे, रण-वीरा रो खूंटो होवे !!

गिरी -सुमेल पर गर्व हो, राजपूत एकता सर्वे हो !
तलवारा रा वार हो, राठौड़ी रि जयकार हो !!

वही आन बान शान हो, राजपुताना अपनी जान हो !

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जन्म भूमी मेवाड़ की रक्षा के खातिर इधर रणभेरी बजी उधर तलवारें चमकी!!!

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जन्म भूमी मेवाड़ की रक्षा के खातिर
इधर रणभेरी बजी
उधर तलवारें चमकी

धरती माँ की रक्षा में
हर वीर की बाहें फडकी

वीरांगनाओं ने कमर कसी
चेहरे पर भय का भाव नहीं

कर्तव्य की बली वेदी पर
चढ़ने कोहर जान तैयार खडी

क्या बच्चा क्या बूढा
क्या माता क्या अबला

हर मन में देशभक्ती की
आग जली

दुश्मन को धूल चटाने को
सेनायें तैयार खडी

राजपुरोहित ने किया तिलक
महाराणा प्रताप के ललाट पे

फिर जोश से बोले
एकलिंगजी का नाम ले

युद्ध में प्रस्थान करो
दुश्मन को सीमा से

बाहर करो
विजय अवश्य तुम्हें ही

मिलेगी
बस हिम्मत होंसला

बनाए रखो
धरती माँ की रक्षा में

जान भी न्योछावर करनी पड़े
तो चिंता मत करो

सुन रहा था चेतक
सारी बातें ध्यान से

उसने भी हिलायी गर्दन
बड़े गर्व और विश्वास से

प्रताप ने खींची रासें
लगायी ऐड चेतक के

जन्म भूमी मेवाड़ की
रक्षा के खातिर

बढ चले सीधे
युद्ध के मैदान को ।

#रणबंका🗡 #सनातनी🗡

हम भूल गये हल्दीघाटी के उस घमाशाण को!!!

॥जय सनातनी एकता॥

हम भूल गये हल्दीघाटी के उस घमाशाण को।
हम भूल गये पन्ना धाय के उस बलिदान को।

राणा साँगा ने तुर्को के अभीमान को तोङा था।
चौहान ने अँधेपन मे भी गौरी का माथा फोङा था।

हम भूल गये राजपुताना की गौरव गाथा को।
वीर दुर्गादास,हाडी राणी,जेता,कुँपा, जयमल और पता को।

राम, कुष्ण और भरत ने क्षत्रीय कुल मे जन्म लिया।
कौरव,कँश और रावण जैसो को खत्म किया।

हनुमान को जाम्बवन ने भूला बल जब याद दिला दिया।
लाँघ गये सौ योजन समुद्र सीता जी का पता लगा लिया।

अब हमे भी अपने गौरव को पून: याद करना है।
खूब मरे हम आपस मे लङके अब और नही मरना है।

धर्म,नीती और सँस्कार जिस दिन हमे याद आ जायेँगे।
सच कहता हुँ हम अपना खोया हुआ गौरव वापस पा जायेँगे

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#आर्यवर्त🗡 #सनातनी🗡

वीर सनातनी!!

वीर सनातनि
वीर!!
वीर चल चले लडने,
रणभूमी मे दुश्मन से भिडने!

अपने शौर्य के दम पर,
चल तु हरदम विजयपथ पर!
शुर है जो,वो ईतिहास मे अमर है,
कर तु भी कुछ के तेरा नाम अमर रहे!
जग को पुन:,
सुसज्जित कर दे अपने शौर्य से!
वीर तु आगे बढ…

वीर चल चले लडने,
रणभूमी मे दुश्मन से भिडने!

ध्वज साथ लिये!
न झुकने दे उसे कभी,
युद्धभुमी मे!
चढाकर तीर धनुष्य पर,
दे अपने साहस का प्रमाण!
न तु डगमगा वीर कभी,
कर युद्ध घमासान!
धीर तु आगे बढ…

वीर चल चले लडने,
रणभूमी मे दुश्मन से भिडने!

देख ध्वज है शान से लहराता,
शुभाशीष देगी भारतमाता!
जोश भर सीने मे,
नही है कोई मजा घुट घुट कर जीने मे!

वीर चल चले लडने,
रणभूमी मे दुश्मन से भिडने!

शहीद हो जाएंगे अब जंग मे,
माँ की लाज बचाएंगे संग मे!
आज है दोनो कुरबान,
माँ की ममता,वीर तेरी जान!

वीर चल चले लडने,
रणभूमी मे दुश्मन से भिडने!

। जय माता जी कि सा ।
। जय सनातनि।

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आरएसएस पर फ़िल्म

RSS पर बनेगी फ़िल्म, 180 करोड़ रुपये होगी लागत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर पहली फिल्म बनने की पूरी तैयारी हो गई है। स्क्रिप्ट फाइनल कर ली गई है, जिसे संघ प्रमुख मोहन भागवत ने देखकर ग्रीन सिग्नल भी दे दिया है। अब फिल्म बनाने के लिए डायरेक्टर और स्टार कास्ट फाइनल की जा रही है। संघ पर बनने वाली इस फिल्म का बजट करीब 180 करोड़ रुपये रखा गया है। यह फिल्म अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले रिलीज हो सकती है।

बाहुबली के राइटर ने लिखी पटकथा: फिल्म बनाने का आइडिया कन्नड़ सिने-ऑडियो टाइकून लहरी वेलु को आया। उन्होंने एनबीटी को बताया कि सुपरहिट फिल्म बाहुबली और बाहुबली-टू के ऑडियो राइट्स भी हमारी म्यूजिक कंपनी ने लिए हैं। ‘बाहुबली’ की सफलता देखकर लगा कि क्यों न संघ पर फिल्म बनाई जाए। वेलु ने बताया, ‘मैं यह आइडिया लेकर बाहुबली फेम एस. राजमौली के पिता विजेंद्र प्रसाद के पास गया। उन्हें यह आइडिया पसंद आया। फिर इस आइडिया के साथ संघ प्रमुख से मिला। उन्होंने भी अपनी सहमति दे दी। विजेंद्र प्रसाद ने स्क्रिप्ट लिखी। करीब दो महीने पहले हम स्क्रिप्ट लेकर संघ प्रमुख से मिले, वह स्क्रिप्ट देखकर बेहद खुश हुए। हमारा मकसद लोगों को संघ की असली पहचान, उनकी विचारधारा, भारत के लिए उनके बलिदान और उनके संघर्ष के बारे में बताना है।
समाचार स्रोत : नवभारत टाइम्स https://goo.gl/KSa224